यशवंत किकोसे जी का भी जवाब नहीं। यूँ तो ड्रामा और फिल्मों से जुड़े है पर काव्य प्रतिभा भी भरपूर है.बहनजी के जन्मदिवस की पूर्व संध्या पर आयोजिक कार्यक्रम में उनके द्वारा कही गई
पंक्तियाँ-
सर्वसमाज का सपना
सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय का सपना
पूरा करेंगी बहनजी
बाबा कांशीराम का सपना पूरा करेंगी बहनजी
जिसने सदियों से अपमान सहा है बहनजी
वही आज सर्वजन को सम्मानित करने में लगी है बहनजी
जिंदगी के सफर में बहुत दुःख झेला है बहनजी
मैं भी आपकी प्रेरणा से दो कदम चला हूँ बहनजी
सर्वजन समाज के अधिकारों के लिए
संघर्ष कर रहीं हैं बहनजी
सर्व समाज की
मानसिक गुलामी की बेड़िया तोड़ देंगी बहनजी
सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय का सपना पूरा करेंगी बहनजी
पूरा करेंगी बहनजी
बाबा कांशीराम का सपना पूरा करेंगी बहनजी
जिसने सदियों से अपमान सहा है बहनजी
वही आज सर्वजन को सम्मानित करने में लगी है बहनजी
जिंदगी के सफर में बहुत दुःख झेला है बहनजी
मैं भी आपकी प्रेरणा से दो कदम चला हूँ बहनजी
सर्वजन समाज के अधिकारों के लिए
संघर्ष कर रहीं हैं बहनजी
सर्व समाज की
मानसिक गुलामी की बेड़िया तोड़ देंगी बहनजी
सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय का सपना पूरा करेंगी बहनजी
यशवंत निकोसे
अध्यक्ष
भारतेंदु नाट्य अकादेमी,लखनऊ
जी सी लाल व्यथित व पंकज प्रसून के काव्य पत्रक में मानवता व समता पर आधारित रचनाओं को उन्होनें क्रन्तिकारी बताया।
पेश है पंकज प्रसून की पंक्तिया-
जीत को जीत समझो न हरा करो
पी सको पानी उतना ही खारा करो
दीनता दासता का दलन हो चला
अब दलित को दलित न पुकारा करो
व्यथित जी की समतामूलक कविता-
कोई न कोई तो जरूर आएगा
जो बात करेगा पंचशील की
जय सामाजिक अभियंत्रण
जय सर्व समाज
यह कार्यक्रम बेहद सफल और बहनजी के प्रति सच्चा सम्मान साबित हुआ
